कैवल्य और निर्वाण का पुनर्विचार: आत्मा और अनात्मा के सन्दर्भ में एक तुलनात्मक दार्शनिक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.48165/IRJAY.2026.90303Keywords:
कैवल्य, निर्वाण, आत्मा, अनात्मा, सांख्य दर्शन, योग दर्शन, बौद्ध दर्शन, मुक्तिAbstract
भारतीय दर्शन की विभिन्न परम्पराओं में ‘मुक्ति’ को मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। सांख्य-योग दर्शन में यह मुक्ति ‘कैवल्य’ के रूप में तथा बौद्ध दर्शन में ‘निर्वाण’ के रूप में प्रतिपादित होती है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य इन दोनों अवधारणाओं का तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक अध्ययन करना है, विशेषतः आत्मा (आत्मन्/पुरुष) और अनात्मा (अनात्मन्) के दार्शनिक आधारों के सन्दर्भ में। सांख्य-योग परम्परा पुरुष की स्वतंत्र एवं शाश्वत सत्ता को स्वीकार करते हुए कैवल्य को पुरुष और प्रकृति के पूर्ण पृथक्करण की अवस्था मानती है, जबकि बौद्ध दर्शन स्थायी आत्मा का निषेध कर निर्वाण को तृष्णा, अविद्या और दुःख के निरोध की स्थिति के रूप में स्थापित करता है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि दोनों परम्पराओं का लक्ष्य दुःख से मुक्ति है, तथापि उनके तात्त्विक आधार, साधना-पद्धति और मुक्ति-दृष्टि में मौलिक भिन्नताएँ विद्यमान हैं। यह शोध भारतीय दार्शनिक परम्पराओं में मुक्ति-सिद्धान्तों की बहुलता एवं बौद्धिक गहनता को रेखांकित करता है।
Downloads
References
[1] अरण्य ह. पतञ्जलि योगदर्शन. वाराणसी: चौखम्बा प्रकाशन; 2015।
[2] उपाध्याय ब. भारतीय दर्शन. वाराणसी: शारदा मन्दिर; 2014।
[3] देव न. बौद्ध धर्म-दर्शन. पटना: बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्; 2008।
[4] धर्मरक्षित भि, अनुवादक. धम्मपद. बुद्धिस्ट पब्लिकेशन सोसायटी; 2011।
[5] राधाकृष्णन स. भारतीय दर्शन. भाग 1-2. नई दिल्ली: राजपाल एण्ड सन्स; 2009।
[6] विवेकानन्द स. राजयोग एवं योगसूत्र. कोलकाता: अद्वैत आश्रम; 2016।
[7] शर्मा रा. भारतीय दर्शन में मुक्ति का स्वरूप. मेरठ: साहित्य भण्डार; 2011।
[8] शास्त्री उ. सांख्य दर्शन. दिल्ली: विजय कुमार गोविन्दराम हासानन्द; 2012।
[9] सांकृत्यायन रा. बौद्ध दर्शन. इलाहाबाद: किताब महल; 2010।
[10] हिरियन्ना म. भारतीय दर्शन की रूपरेखा. दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास; 2017।
[11] फ्राउवाल्नर ई. हिस्ट्री ऑफ इंडियन फिलॉसफी. दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास; 1973।
[12] लार्सन जीजे. क्लासिकल सांख्य: एन इंटरप्रिटेशन ऑफ इट्स हिस्ट्री एंड मीनिंग. दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास; 1979।
[13] नाकामुरा एच. इंडियन बुद्धिज़्म: ए सर्वे विद बिब्लियोग्राफिकल नोट्स. दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास; 1980।
[14] पतञ्जलि. योग सूत्र्स ऑफ पतञ्जलि. स्वामी विवेकानन्द द्वारा अनूदित. कोलकाता: अद्वैत आश्रम; 2002।
[15] राधाकृष्णन एस. इंडियन फिलॉसफी. खण्ड 1–2. ऑक्सफोर्ड: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस; 1951।
[16] ईश्वरकृष्ण. सांख्यकारिका. जीजे लार्सन द्वारा अनूदित. दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास; 1998।
[17] राहुला डब्ल्यू. व्हाट द बुद्ध टॉट. न्यूयॉर्क: ग्रोव प्रेस; 1974।
[18] धम्मपद. आचार्य बुद्धरक्षित द्वारा अनूदित. कैंडी: बुद्धिस्ट पब्लिकेशन सोसायटी; 1985।
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 रश्मि (Author)

This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.

